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01 August 2017

एक कहानी ऐसी लिख दूँ


एक कहानी ऐसी लिख दूँ
जिसमें अपने मन की कह दूँ
काले यथार्थ की गहरी परतों पर
कल आज और कल को रच दूँ।

एक कहानी ऐसी लिख दूँ
जिससे जुड़ा हो बचपन सब का
परावर्तित हो भूत-भविष्य और
दिखे चलचित्र तब और अब का।

एक कहानी ऐसी लिख दूँ
जिसका अंत अनादि हो कर
जुड़ा हो सबके अपने आज से
कुछ कल्पना के रंग में घुल कर।

एक कहानी ऐसी लिख दूँ
जिसमें अपने मन की कह कर
शब्दों के मनकों से जुड़ लूँ
और हल्का खुद को थोड़ा कर लूँ।

एक कहानी ऐसी लिख दूँ।

-यश © 
01/08/2017

बहुत दिन पुराना यह अधूरा ड्राफ्ट आखिरकार आज पूरा हुआ :)

3 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (02-08-2017) को गये भगवान छुट्टी पर, कहाँ घंटा बजाते हो; चर्चामंच 2685 पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  2. और हल्का खुद को थोड़ा कर लूं......बेहतरीन।

    ReplyDelete
  3. सुंदर भावपूर्ण..

    ReplyDelete

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