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26 March 2014

वक़्त के कत्लखाने में -3

वक़्त के कत्लखाने में
सांसें गिनती जिंदगी
कितने ही एहसासों को
खुद के भीतर दबाए
हर पल
मांगती रहती है मन्नतें
इस दुनिया के पार जाने की
लेकिन
तैयार नहीं
देने को
इम्तिहान
तो विकल्प क्या ...?
हाँ विकल्प है
सिर्फ एक ही विकल्प
कि वक़्त के कत्लखाने में
सांसें गिनती जिंदगी 
वक़्त से पहले ही
उम्मीदों की 
सबसे ऊपरी मंज़िल से 
कूदकर नीचे
हो जाए मुक्त
इन तमाम झंझटों से।

~यशवन्त यश©

8 comments:

  1. कूदना जरूरी नहीं
    उतर कर धीरे धीरे
    चल कर भी तो
    आ सकती है
    जिंदगी
    वक्त के साथ साथ
    कत्लखाने में
    ही सही :)

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  2. बहुत सुन्दर और गहन प्रस्तुति...

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  3. जिन्दगी अमूल्य है..बस यह बात जान ले तो यह भी जान लेगी कि हर उम्मीद टूटने के लिए ही होती है..उसका और कोई उपयोग नहीं है, इससे सीख लेकर ही तो जिंदगी अपनी कीमत जान पाती है

    ReplyDelete
  4. गहन प्रस्तुति.....बहुत बढिया..

    ReplyDelete
  5. I loved the theme. The inner desire to break free :)

    Nice read

    ReplyDelete
  6. ऐसा नहीं होता कि सिर्फ निराशा ही निराशा हो आशा छिपी हुई हो सकती है नष्ट नहीं डट कर सामना करने की जरूरत है ....

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