सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यद्यपि मेरे अपने लिखे का स्तर कहीं भी प्रकाशन योग्य नहीं है, फिर भी यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

30 July 2013

कल्पना की लहरें .....

चित्र साभार-गूगल सर्च
(1)
कभी
कल कल कर
निर्बाध बह बह कर
किनारे पर आ लगती थीं
कल्पना की
अलग अलग लहरें....
कहती थीं
अपने हिस्से का सच
छोड़ जाती थीं
भीतर समाए हुए
सीपियों के कुछ निशां 
जिन से झलकती थी
सरसता और
मौलिकता ।

(2)
विकास के इस दौर में
पल पल बदलती रंगत में
न जाने कहाँ खो गयी है
वह निर्बाध कल कल
काली-स्याह
प्रदूषित
मेरे इस युवा समय की
भोंथरी कल्पना
अब अपने भीतर
सीप नहीं ...
लेकर चलती है
सड़े गले अवशेष
दरकिनार कर के
पुरानी बूढ़ी विरासत को
और किनारे की रेत मे
छोडती चलती है
भाव रहित
बे हिसाब ठोस
कंकड़ पत्थर
जो बने हैं
सरसता
और मौलिकता की
दुखियारी आँखों से
गिरते आंसुओं की
हर एक बूंद से। 

 ~यशवन्त माथुर©

14 comments:

  1. कल्पना की लहरें मोती सीप लाती रहेंगी किनारे तक... बची रहेगी मौलिकता!

    ReplyDelete
  2. बहुत सुंदर पोस्ट
    saral-sahaz shabdo men gudh abhivyakti
    हार्दिक शुभकामनायें

    ReplyDelete
  3. दोनों रचनाएँ गहरे अर्थ संजोये....

    ReplyDelete
  4. कल्पना की लहरें मन की सच्ची भावो को शब्द तो देगी ही..बहुत बढ़िया..शुभकामनाएं..यशवंत

    ReplyDelete
  5. सुंदर कविताएं ,उत्तम |

    ReplyDelete
  6. बहुत सुंदर

    यहाँ भी पधारे
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_29.html

    ReplyDelete
  7. कल्पना की लहरें बड़ी गहराई से उठी हैं...
    बहुत सुन्दर
    सस्नेह
    अनु

    ReplyDelete
  8. सच कहा अब कम हो रहा है मौलिकता और बढ रहा है
    कृत्रिमता हमें कुछ करना होगा जिससे बनी रहे मौलिकता......

    ReplyDelete
  9. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवारीय चर्चा मंच पर ।।

    ReplyDelete
  10. यशवंत जी, कविता का दायरा बहुत विशाल है..परमात्मा के जैसे कविता सब कुछ अपने में समेट लेती है, जो बात भी मानव मन को छू जाये आंदोलित करके उसके भाव जगत को विलोड़ित करे वह कविता ही है..कविता सप्रयास कही नहीं जाती अनायास ही हो जाती है..सो हम तो आपकी रचना को कविता ही मानेंगे...सत्य को देखने का प्रयास करती हुई सुंदर कविता..

    ReplyDelete
  11. kalpna ki lahron ne sacchai ka bakhoobi bayan kar diya ,....

    ReplyDelete
  12. भूल सुधार
    बुधवार की चर्चा में

    ReplyDelete
  13. बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  14. सुन्दर प्रभावी रचना … शुभकामनायें

    ReplyDelete

कृपया किसी प्रकार का विज्ञापन कमेन्ट मे न दें।
कमेन्ट मोडरेशन सक्षम है। अतः आपकी टिप्पणी यहाँ दिखने मे थोड़ा समय लग सकता है।

Please do not advertise in comment box.
Comment Moderation is active.so it may take some time in appearing your comment here.

+Get Now!