प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

03 April 2011

ये तो होना ही था

प्यार उसने भी किया था
महसूस उसने भी किया था
सपने उसने भी बुने थे
दिन महकने लगे थे
पर अचानक
एक जोर का झटका
हिला गया उसको
और उसने देखा
शीशे के दिल के
अनगिनत टुकड़े
ज़मीन पर बिखरे पड़े थे
और सहारा देने को
आंसू अपनी बाहें फैलाये
कह रहे थे -
ये तो होना ही था.

16 comments:

  1. bhut hi khubsurat panktiya hai dil ke bhaavo ko batati....

    ReplyDelete
  2. शीशे के दिल के
    अनगिनत टुकड़े
    ज़मीन पर बिखरे पड़े थे
    bahut sundar panktiyan ...

    ReplyDelete
  3. दोनों ने किया था प्यार मगर,
    मुझे याद रहा..... तू भूल गई ,
    मेरी महुआ....ओ मेरी महुआ...

    ReplyDelete
  4. सीसे का टूटना तो नियति है, प्यार बचाया जा सकता है प्यार से .. अच्छे शब्द बधाई

    ReplyDelete
  5. शीशे के दिल के
    अनगिनत टुकड़े
    ज़मीन पर बिखरे पड़े थे

    मार्मिक ....संवेदनशील भाव

    ReplyDelete
  6. बिलकुल, टूटने के लिए ही तो बना है !

    ReplyDelete
  7. शीशे के दिल के
    अनगिनत टुकड़े
    ज़मीन पर बिखरे पड़े थे
    और सहारा देने को
    आंसू अपनी बाहें फैलाये
    कह रहे थे -
    ये तो होना ही था....

    संवेदनाओं से भरी बहुत सुन्दर कविता...

    ReplyDelete
  8. ओह बहुत ही गहरी बात कह दी…………बहुत सुन्दर रचना।

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  10. प्यार मे यही होता है
    सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  11. और सहारा देने को
    आंसू अपनी बाहें फैलाये
    कह रहे थे -
    ये तो होना ही था.

    End of the poetry is very touching.

    नव-संवत्सर और विश्व-कप दोनो की हार्दिक बधाई .

    ReplyDelete
  12. दिल वो भी शीशे का -टूटना ही था ......
    अच्छी अभिव्यक्ति ..
    शुभकामनायें ...

    ReplyDelete
  13. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!

    ReplyDelete
+Get Now!