सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यद्यपि मेरे अपने लिखे का स्तर कहीं भी प्रकाशन योग्य नहीं है, फिर भी यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

01 December 2010

सिगरेट! अगर तू न होती

(1)
(चित्र साभार:गूगल इमेज सर्च)

सिगरेट! अगर तू न होती
तो बच जाता मैं भी
बगल वाले नेता जी के
मुहं से निकलने वाले
अजीब से
धुंए से
जो मुश्किल कर देता है
जाड़े की गुनगुनी धूप में
दो पल का मेरा बैठना

(२)

सिगरेट! अगर तू न होती
तो कितने ही
कैंसर न पनपते
झोपड़ियों और महलों में
रहने वाले
न रोते,न कलपते

पर तू है!
और तेरा आस्तित्व भी है
कहीं दो कहीं पचास और सौ रुपये में
तू छीन लेती है ईमान
नए किशोरों का
जो भटक जाते हैं
तेरे छलावे में

काश! के कुछ होठों पे
नयी मुस्कान होती
सिगरेट! अगर तू न होती

16 comments:

  1. बिल्कुल सही कहा…………सुन्दर प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (2/12/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

    ReplyDelete
  3. भाई यशवन्‍त, बहुत ही बढिया रचना, बधाई।

    ReplyDelete
  4. बहुत बडिया। सिगरेट ने तो न जाने कितने लोगों को बर्बाद किया। फिर भी कोई समझता नही। शुभकामनायें।

    ReplyDelete
  5. पर तू है!
    और तेरा आस्तित्व भी है
    कहीं दो कहीं पचास और सौ रुपये में
    तू छीन लेती है ईमान
    नए किशोरों का
    जो भटक जाते हैं
    तेरे छलावे में
    पर तू है!
    और तेरा आस्तित्व भी है
    कहीं दो कहीं पचास और सौ रुपये में
    तू छीन लेती है ईमान
    नए किशोरों का
    जो भटक जाते हैं
    तेरे छलावे में

    बहुत सुंदर ...सन्देश देती रचना.....

    ReplyDelete
  6. काश! के कुछ होठों पे
    नयी मुस्कान होती
    सिगरेट! अगर तू न होती

    न जाने कितने घरों को बर्बाद किया है और न जाने कितनी जानें ली हैं इसने...सच में कितने ही होठों पर मुस्कान होती अगर ये नहीं होती। बहुत सार्थक और सारगर्भित रचना...बधाई

    ReplyDelete
  7. बहुत सुन्दर रचना .बधाई !

    इस विषय पर ग्राम चौपाल में पढ़े -------सावधान :सवा अरब तंबाकू पीने वाले पौने पांच अरब लोगों को " पैसिव स्मोकिंग " के लिए कर रहे मजबूर

    ReplyDelete
  8. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  10. बहुत ही सुन्दर कविता.

    ReplyDelete
  11. संदेशपूर्ण प्रेरक सुन्दर प्रस्तुति..

    ReplyDelete
  12. पर तू है!
    और तेरा आस्तित्व भी है
    कहीं दो कहीं पचास और सौ रुपये में
    तू छीन लेती है ईमान
    ..........सुंदर सन्देश

    ReplyDelete
  13. काश! ये बात सिगरेट पीने वाले भी समझ जाए तो कितना अच्छा हो......बहुत बढ़िया सन्देश......

    ReplyDelete
  14. awesome creation...!! young generation will be surely affected .. thanks for bringing SmiLE...

    ReplyDelete
  15. awesome creation......... modern generation will be surely affected..!!!!!! thanks for bringing a SmiLe for me......!!!

    ReplyDelete

कृपया किसी प्रकार का विज्ञापन कमेन्ट मे न दें।
कमेन्ट मोडरेशन सक्षम है। अतः आपकी टिप्पणी यहाँ दिखने मे थोड़ा समय लग सकता है।

Please do not advertise in comment box.
Comment Moderation is active.so it may take some time in appearing your comment here.

+Get Now!